बुधवार, 30 मार्च 2011
लोकतांत्रिक मूल्यों में थी नेहरू की आस्था: रविंद्रा
यमुनानगर। पंडित जवाहर लाल नेहरू की लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था थी। आधुनिक भारत के निर्माण में उनका अतुल्नीय योगदान है। उक्त शब्द चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व उप कुलपति पदमश्री डा. रविंद्रा कुमार ने डीएवी गल्र्स कालेज के नेहरू स्टडी सेंटर द्वारा नेहरू और समाजवाद विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने की।
डा. रविंद्रा कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण में नेहरू के योगदान को कभी भूलाया नहीं जा सकता। देश के पुन:निर्माण में पंडित नेहरू जी का योगदना समर्णिय है। किसी भी महान व्यक्ति के विचारों को पूर्वाग्रह से देखा जाता है। लेकिन हमें परिस्थितियों के अनुसार ही उनके विचारों का अपनाना चाहिए। देश के विकास के लिए उन्होंने टीम के रुप में कार्य किया। आज लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। जो कि गलत है।
गांधी मैमोरियल म्यूजियम एंड गांधी लाइब्रेरी नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर प्रोफेसर अनिल मिश्रा ने कहा कि हम विड़ंबनाओं के देश में रह रहे हैं और नेहरू जी विड़ंबनाओं को खतम करने की कौशिश की थी। नेहरू के सामने आजादी के दौरान कितनी चुनौतियां थी, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अगर पाकिस्तान नहीं बनता, तो आज हिंदूस्तान के अनेक टूकड़े हो गए होते। सरदार पटेल के एक पत्र से खुलासा हुआ है कि देश के विभाजन में पटेल, नेहरू व जिन्ना शामिल थे। नेहरू का उद्देश्य भारत को लोकतांत्रिक बनाना था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, आईआईटी, बाखड़ा डैम, इत्यादि सभी नेहरू जी की देन है। नेहरू ने देश में विज्ञान व कला को बढ़ाया दिया। लेकिन आज हम आजाद भारत के गुलाम नागरिक है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय राजनीति शास्त्र विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर आरएस यादव ने कहा कि नेहरू के विचारों में पूंजीवादी व माक्र्सवादियों का मिश्रण था। नेहरू सामाजिक बदलाव तो चाहते थे, लेकिन वे क्रांति के खिलाफ थे। नेहरू का समाजवाद अंतर्राष्ट्रीय स्थिति से जुड़ा हुआ है। नेहरू की सोच थी कि आखिरी आदमी तक योजना का लाभ पहुंचना चाहिए। तभी समाजवाद की सार्थकता सिद्ध होगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हिमांशु राय ने बताया कि वर्ष १९६२ में जब लोकसभा सत्र के दौरान अटल बिहारी बाजपेयी ने नेहरू जी की आलोचना की थी, तो तब नेहरू ने कहा था कि वह भविष्य का प्रधानमंत्री है। नेहरू जी की दूरदृष्टि थी। उन्होंने कृषि के विकास के लिए कारगर कदम उठाए। नरेगा अब लागू हुआ है, जिसकी बात उन्होंने वर्षों पहले की थी। राइट टू फूड एक्ट, रोजगार का अधिकार इन सबकी की शुरूआत नेहरू जी ने बहुत पहले कर दी थी।
एचआईआईआरडी नीलोखेड़ी के डायरेक्टर प्रोफेसर रणबीर सिंह ने कहा कि नेहरू जी द्वारा बनाए गए पब्लिक सेक्टर का लाभ पूंजीपतियों को मिला। जिस कारण उस समय अमीरों व गरीबों के बीच खाई बढ़ गई। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में उन्होंने भूमि सुधार पर ध्यान दिया, लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की वहज से सुधार नहीं हो पाया। नेहरू ने साम्यवादियों व समाजवादियों को साथ नहीं जोड़ा। समाजवादी नेहरू को समाजवादी नहीं मानते थे और पूंजीवादी उन्हें समाजवादी कहते थे। आज के बदलते युग में नेहरू जी के विचार उतने ही प्रासांगिक है, जितने उस समय थे।
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के सेवानिवृत प्रोफेसर पीएस वर्मा ने कहा कि जमींदारी प्रथा को खतम करने में नेहरू जी का योगदान था। वे मानते थे कि बड़े उद्योगों पर सरकार का कब्जा हो, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकें। पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मनीष शर्मा ने इंटरनेशनल टैरिज़म व इंवायरमेंट क्लाइमेट्स चेंज पर विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा नेहरू नवभारत का निर्माण करना चाहते थे। पंजाब यूनिवर्सिटी की प्राध्यापिका कनुप्रिया ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नेहरू की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश का कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए। नेहरू स्टडी सेंटर के इंचार्ज प्रोफेसर मलकीत सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। डा. आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्राओं के ज्ञान में वृद्धि होती है।
गांधी मैमोरियल म्यूजियम एंड गांधी लाइब्रेरी नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर प्रोफेसर अनिल मिश्रा ने कहा कि हम विड़ंबनाओं के देश में रह रहे हैं और नेहरू जी विड़ंबनाओं को खतम करने की कौशिश की थी। नेहरू के सामने आजादी के दौरान कितनी चुनौतियां थी, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अगर पाकिस्तान नहीं बनता, तो आज हिंदूस्तान के अनेक टूकड़े हो गए होते। सरदार पटेल के एक पत्र से खुलासा हुआ है कि देश के विभाजन में पटेल, नेहरू व जिन्ना शामिल थे। नेहरू का उद्देश्य भारत को लोकतांत्रिक बनाना था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, आईआईटी, बाखड़ा डैम, इत्यादि सभी नेहरू जी की देन है। नेहरू ने देश में विज्ञान व कला को बढ़ाया दिया। लेकिन आज हम आजाद भारत के गुलाम नागरिक है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय राजनीति शास्त्र विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर आरएस यादव ने कहा कि नेहरू के विचारों में पूंजीवादी व माक्र्सवादियों का मिश्रण था। नेहरू सामाजिक बदलाव तो चाहते थे, लेकिन वे क्रांति के खिलाफ थे। नेहरू का समाजवाद अंतर्राष्ट्रीय स्थिति से जुड़ा हुआ है। नेहरू की सोच थी कि आखिरी आदमी तक योजना का लाभ पहुंचना चाहिए। तभी समाजवाद की सार्थकता सिद्ध होगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हिमांशु राय ने बताया कि वर्ष १९६२ में जब लोकसभा सत्र के दौरान अटल बिहारी बाजपेयी ने नेहरू जी की आलोचना की थी, तो तब नेहरू ने कहा था कि वह भविष्य का प्रधानमंत्री है। नेहरू जी की दूरदृष्टि थी। उन्होंने कृषि के विकास के लिए कारगर कदम उठाए। नरेगा अब लागू हुआ है, जिसकी बात उन्होंने वर्षों पहले की थी। राइट टू फूड एक्ट, रोजगार का अधिकार इन सबकी की शुरूआत नेहरू जी ने बहुत पहले कर दी थी।
एचआईआईआरडी नीलोखेड़ी के डायरेक्टर प्रोफेसर रणबीर सिंह ने कहा कि नेहरू जी द्वारा बनाए गए पब्लिक सेक्टर का लाभ पूंजीपतियों को मिला। जिस कारण उस समय अमीरों व गरीबों के बीच खाई बढ़ गई। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में उन्होंने भूमि सुधार पर ध्यान दिया, लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की वहज से सुधार नहीं हो पाया। नेहरू ने साम्यवादियों व समाजवादियों को साथ नहीं जोड़ा। समाजवादी नेहरू को समाजवादी नहीं मानते थे और पूंजीवादी उन्हें समाजवादी कहते थे। आज के बदलते युग में नेहरू जी के विचार उतने ही प्रासांगिक है, जितने उस समय थे।
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के सेवानिवृत प्रोफेसर पीएस वर्मा ने कहा कि जमींदारी प्रथा को खतम करने में नेहरू जी का योगदान था। वे मानते थे कि बड़े उद्योगों पर सरकार का कब्जा हो, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकें। पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मनीष शर्मा ने इंटरनेशनल टैरिज़म व इंवायरमेंट क्लाइमेट्स चेंज पर विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा नेहरू नवभारत का निर्माण करना चाहते थे। पंजाब यूनिवर्सिटी की प्राध्यापिका कनुप्रिया ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नेहरू की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश का कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए। नेहरू स्टडी सेंटर के इंचार्ज प्रोफेसर मलकीत सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। डा. आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्राओं के ज्ञान में वृद्धि होती है।
समाज को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं मूल्यों में गिरावट
मां तो मां, दर्शकों को भी रूला गया मारिया का सच।काश यह झूठ हो, ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या ऐसा हो सकता है, यह सवाल हर दर्शक के जेहन में था। रिश्ते की मर्यादा क्या इतनी भी नहीं। या यह पश्चिम की समस्या है। ... नहीं हमारे यहां भी तो ऐसा ही हो जाता है। क्यों, पता नहीं। मां और बेटी दोनों एक से प्रेम करती हैं। पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंगा नाटक मारिया कुछ जगह दर्शकों को विचलित करता नजर आया। डीएवी गल्र्स कालेज में नाटक उत्सव के दौरान जकिया जुबैरी की कहानी ‘मारिया’ का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन इंद्र राज इंदू ने किया। अविवाहित रिश्ता और इससे पैदा हुआ बच्चा। समाज की चिंता हमें ही नहीं उन्हें भी है। वे भी डरते हैं। हमारे यहां ही अविवाहित मां बच्चे को लावारिश छोडऩे के लिए अभिशप्त नहीं है, वहां भी है। यहीं इस नाटक का सार है। अविवाहित मां अपनी बेटी को लावारिश छोड़ देती है। बरसों साथ गुजार दिए सिर्फ इस अहसास के साथ कि कल क्या होगा। जो वो चाहती थी वह नहीं मिला। पे्रमी भी छोड़ कर चला गया। तब जब उसे अपने प्यार के सहारे की जरुरत होती है। कहानी घूम जाती है। मां को बेटी मिलती है जो गर्भवती है। मां अपनी बेटी से पूछती है कि तुमने इतनी बड़ी कुर्बानी किसके लिए दी बेटी। बेटी के मुंह से निकला हुआ संवाद कि मां जिसके पास तुम जाती थी। कहानी घूम जाती है। मां को बेटी मिलती है जो गर्भवती है। मां अपनी बेटी से पूछती है कि तुमने इतनी बड़ी कुर्बानी किसके लिए दी बेटी। बेटी के मुंह से निकला हुआ संवाद कि मां जिसके पास तुम जाती थी। यह संवाद सुनकर दर्शकों को एक ऐसे सच का सामना करना पड़ता है कि शर्म से सिर झुक जाता है।
हम भी पश्चिम में आ गए : कहानी क्योंकि पश्चिम परिवेश की है। ऐसे में पात्रों की ड्रेस भी वहां के अनुरुप थी। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि पात्रों की भावभंगिमाएं भी पूरी तरह से पाश्चात्य रंग में रंगी हुई थीं। यहीं वजह रही कि वे अपनी बात को बहुत ही करीने से कह गए।
हमारी भी समस्या है : नाटक के निदेशक इंद्रराज इंदू ने बताया कि मारिया नाटक आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। हम रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे बहुत सारे उदाहरण हमारे सामने हैं। समाज में खुलापन आ रहा है। इसके साथ ही इस तरह की दिक्कत भी आएगी। इससे बच नहीं सकते।
जाकिया जुबैरी एक परिचय : पाकिस्तान मूल की जाकिया जुबैरी लंबे समय से इंग्लैंड में रह रही है। वह वहां की राजनीति में सक्रिय है। हिंदी से जुड़ी जाकिया जुबैरी पश्चिम में भी मूल्य तलाशती हैं। उनका कहना है कि मूल्यों की गिरावट किसी एक समाज की समस्या नहीं, हर समाज की दिक्कत है।
लिखो हिंदी पाओ पंजाबी
----------------------------------
http://h2p.learnpunjabi.org/default.aspx
----------------------------------
ਲਿਖੋ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ ਪੜੋ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ : ਚਾਹੇ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ ਲਿਖੇ ਹੋਏ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜੇ ਜਾਣ ਦੀ ਗੱਲ ਹਜ਼ਮ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇ ਪਰ ਹੈ ਬਿਲਕੁੱਲ ਸੱਚ । ਕੰਪਿਊਟਰ ਦੇ ਦੁਆਰੇ ਅਜਿਹਾ ਕਰਣਾ ਬਿਲਕੁੱਲ ਸੰਭਵ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ । ਇਹ ਸਾਫਟਵੇਯਰ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ ਲਿਖੇ ਹੋਏ ਵਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਅਨੁਵਾਦ ਕਰਕੇ ਪੜ੍ਹਨੇ ਦੀ ਸਹੂਲਤ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹਿੰਦੀ ਤੋਂ ਅਨਜਾਨ ਪੰਜਾਬੀ ਪਾਠਕ ਕਿਸੇ ਹਿੰਦੀ ਕਿਤਾਬ ਜਾਂ ਲੇਖ ਆਦਿ ਨੂੰ ਇੱਕ ਝਟਕੇ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਬਦਲਾ ਵੇਖ ਸੱਕਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਸਾਫਟਵੇਯਰ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਇਹ ਵੀ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ ਟਾਈਪ ਕੀਤੇ ਮੁੱਦਾ ਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਈ - ਮੇਲ ਕਰ ਸੱਕਦੇ ਹੋ । ਜੇਕਰ ਉਪਭੋਗਤਾ ਚਾਹੇ ਤਾਂ ਹਿੰਦੀ ਦੇ ਮੁੱਦੇ ਨੂੰ ਅਨੁਵਾਦ ਕਰਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਈ - ਮੇਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
मंगलवार, 29 मार्च 2011
सोमवार, 28 मार्च 2011
थियेटर फेस्टिवल का आयोजन : गवाह नाटक का मंचन
यमुनानगर। डीएवी गल्र्स कालेज में सोमवार को थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें अंग्रेजी लेखिका अगाथा क्रिस्टी की रचना पर आधारित सुप्रसिद्ध कथाकार संजय सहाय द्वारा निर्देशित गवाह नाटक का मंचन हुआ। नाटक को देखकर दर्शक इतने अभिभुत हुए कि कालेज का सभागार आधे घंटे तक तालियों से गूंजता रहा। कलाकारों द्वारा की गई अदाकारी की सभी ने प्रशंसा की। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने नाटक के निर्देशकों, कलाकारों व दर्शकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुकंद लाल शिक्षण संस्थाओं के महासचिव डा. रमेश कुमार मुख्य अतिथि रहे। मौके पर सुप्रसिद्ध पत्रकार अजीत राय भी उपस्थित रहे।
मर्डर मिस्ट्री पर आधारित गवाह नाटक के दौरान दिखाया गया कि अदालत में केस को किस प्रकार से तरोड़ा मोड़ा जाता है। हत्यारे के खिलाफ ढेर सारे सबूत व गवाह होने के बावजुद किस प्रकार से ज्यूरी सिस्टम को दिगभ्रमित किया जा सकता है। नाटक का क्लाइमेक्स देखकर सभागार में बैठे दर्शक तब अचंभित रह जाते हैं। जब वास्तव में हत्या करने वाले लियोनार्ड वोल को अदालत से बाइज्जत बरी कर दिया जाता है। इस सारी प्रक्रिया में शहर का नामी वकील भी धोखा खा जाता है।
नाटक में लियोनार्ड वोल पर एक अधेड़ उम्र की औरत एमली फे्रंच की हत्या का आरोप है। उसके खिलाफ ढेर सारे सबूत व गवाह है। वोल चाहता है कि वकील सर विलफ्रीड उसकी पत्नी रोमेन को गवाही के लिए बुलाए। लेकिन वह ऐसा नहीं करता। फिर अचानक रोमेन सरकारी गवाह बनकर अपने पति वोल के खिलाफ गवाही देती है और कहती है कि वह उसकी पत्नी नहीं है और वोल ने ही एमली की हत्या की है। जिस कारण वोल की फांसी ज्यादा पुख्ता हो जाती है। इसी बीच वोल के वकील के पास कुछ चि_ियां आती है। जिसमें लिखा होता है कि रोमेन अपने प्रेमी के साथ मिलकर वोल को फांसी पर लटकवाना चाहती है। ताकि वह उससे आजाद हो सके। इसके बाद कोर्ट में वोल के प्रति सहानुभूति पैदा हो जाती है। जिस कारण वह बरी हो जाता है। बाद में पता चलता है कि वोल व रोमेन दोनों ने मिलकर १५ करोड़ रुपयों के लिए एमली फे्रंच की हत्या की थी और सारा ड्रामा खुद ही रचा था।
नाटक के दौरान जटिल संवादों ने कलाकारों ने इस प्रकार से प्रस्तुत किया कि वह मंच पर जीवंत हो उठे। नाटक में बताया गया कि वहीं सच नहीं होता, जो दिखता है। आज के समय में अगर इस प्रकार की घटना घटती तो मीडिया उसपर कितना उन्माद पैदा करता, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। ज्यूरी सिस्टम की इन खामियों से सबक ले, मीडिया को कोर्ट से पहले फैसले नहीं सुनाने चाहिए और तथ्यों पर आधारित कोर्ट के फैसले तक संयम बरतना चाहिए।
नाटक की समाप्ति पर निर्देशक संजय सहाय ने कहा कि इस प्रकार के नाटक हमें समाज में हो रही घटनाओं से जोड़ते हैं। उन्होंने सभागार में बैठे सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
डा. रमेश ने कहा कि नाटक में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत अभिनय की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। कलाकारों ने हर घटना को इतनी बारिकी से प्रस्तुत किया कि घटना जीवंत हो उठी। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उत्सव कालाकारों की प्रतिभा को निखाराना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस प्रकार और भी आयोजन किए जाएंगे।
नाटक की समाप्ति पर निर्देशक संजय सहाय ने कहा कि इस प्रकार के नाटक हमें समाज में हो रही घटनाओं से जोड़ते हैं। उन्होंने सभागार में बैठे सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
डा. रमेश ने कहा कि नाटक में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत अभिनय की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। कलाकारों ने हर घटना को इतनी बारिकी से प्रस्तुत किया कि घटना जीवंत हो उठी। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उत्सव कालाकारों की प्रतिभा को निखाराना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस प्रकार और भी आयोजन किए जाएंगे।
शनिवार, 26 मार्च 2011
मेरे शहर का दुःख या सारे देश का .....
बढती आबादी के मद्देनजर शहरों में ठोस कचरा बढा है परन्तु मेरे शहर के सफाई कर्मचारिओं ने एक अजीब पर्यावरण नाशी तरीका ढूंढा है वो ठोस कचरा एकत्र करते है और उसे वहीं पर ही जला देते है |
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सार्वजनिक सफाईव्यवस्था का अध्यन |
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सफाई कर्मचारिओं के कार्यकलापों को देखने पर पाया गया कि वो कचरा एकत्र करते है और उस में आग लगा देते है उस कचरे में आधिक मात्रा में पोलीथीन होती है लोगो को पता नहीं है वो पोलीथीन के निपटान का साधन उस में आग लगा देना मानते है| वो नहीं जानते कि पोलीथीन को यदि उच्च ताप पर बंद भट्टी में जलाया जाये तो बनने वाली सारी गैसे भी जल जाती है और सिर्फ CO2 गैस बनती है परन्तु यदि इन सफाई कर्मचारिओं की तरह वातावरण में सुलगा कर छोड़ दिया जाए तो ये दिन भर सुलग सुलग कर बदबूदार धुआं छोड़ती रहेगी | मेरे शहर में दिन भर अजीब सी बदबू फैली रहती है
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सफाई कर्मचारिओं के कार्यकलापों को देखने पर पाया गया कि वो कचरा एकत्र करते है और उस में आग लगा देते है उस कचरे में आधिक मात्रा में पोलीथीन होती है लोगो को पता नहीं है वो पोलीथीन के निपटान का साधन उस में आग लगा देना मानते है| वो नहीं जानते कि पोलीथीन को यदि उच्च ताप पर बंद भट्टी में जलाया जाये तो बनने वाली सारी गैसे भी जल जाती है और सिर्फ CO2 गैस बनती है परन्तु यदि इन सफाई कर्मचारिओं की तरह वातावरण में सुलगा कर छोड़ दिया जाए तो ये दिन भर सुलग सुलग कर बदबूदार धुआं छोड़ती रहेगी | मेरे शहर में दिन भर अजीब सी बदबू फैली रहती है
जब हम ने एक सफाई कर्मचारी से पूछा तो उसने बताया कि कूड़ा इस लिए जलाता हूँ , हमारे पास साधन नहीं है. कामचोरी इनकी सेह्त हमारी .
वालंटियर्स जांचेंगे मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग
-प्रदेश के सात जिले में रखे जाएंगे पांच हजार से ज्यादा वालंटियर्स-
-यमुनानगर जिले में नियुक्त होंगे ६७० वालंटियर्स-
-ग्रामीण क्षेत्र में २०० व शहरी क्षेत्र में ५०० घरों की जांच करेगा एक वालंटियर-
-यमुनानगर जिले में नियुक्त होंगे ६७० वालंटियर्स-
-ग्रामीण क्षेत्र में २०० व शहरी क्षेत्र में ५०० घरों की जांच करेगा एक वालंटियर-
जगाधरी। आने वाले दिनों में अगर कोई व्यक्ति आपके घर पर आकर कूलर, गमलों व अन्य जगह पर रखे पानी में मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग (अड्डे देने वाली जगह) चेक करें, तो चौकिए मत। मलेरिया की रोकथाम के लिए डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने प्रदेश के सात जिलों में पांच हजार से ज्यादा वालंटिसर्य को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यमुनानगर जिले को भी इसमें शामिल किया गया है। मच्छर की ब्रिडिंग की जांच करने से पहले स्वास्थ्य विभाग बकायदा इन वालंटियर्स क टे्रनिंग देगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा मलेरिया के केसिज़ यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा, गुडग़ांव, फरीदाबाद व फतेहाबाद जिले में सामने आते हैं। इन जिलों में मलेरिया पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने इस बार पहले से ही रणनीति बनाई है। विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक उक्त जिलों में गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखे जाएंगे। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग जांचेंगे। हाल ही में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने उक्त सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर वालंटियर्स रखने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जिला स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पीएचसी व सीएचसी स्तर पर दी जाएगी टे्रनिंग-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग चेक करने के लिए जिन वालंटियर्स को नियुक्त किया जाएगा, उन्हें पीएचसी व सीएचसी स्तर पर बकायदा टे्रनिंग दी जाएगी। टे्रनिंग के दौरान उन्हें मलेरिया मच्छर व लारवे की पहचान के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। लारवे को किस प्रकार से नष्ट करना है और उसे आगे फैले कैसे रोकना है, इस बारे में भी उन्हें बताया जाएगा। ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा मलेरिया के केसिज़ यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा, गुडग़ांव, फरीदाबाद व फतेहाबाद जिले में सामने आते हैं। इन जिलों में मलेरिया पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने इस बार पहले से ही रणनीति बनाई है। विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक उक्त जिलों में गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखे जाएंगे। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग जांचेंगे। हाल ही में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने उक्त सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर वालंटियर्स रखने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जिला स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पीएचसी व सीएचसी स्तर पर दी जाएगी टे्रनिंग-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग चेक करने के लिए जिन वालंटियर्स को नियुक्त किया जाएगा, उन्हें पीएचसी व सीएचसी स्तर पर बकायदा टे्रनिंग दी जाएगी। टे्रनिंग के दौरान उन्हें मलेरिया मच्छर व लारवे की पहचान के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। लारवे को किस प्रकार से नष्ट करना है और उसे आगे फैले कैसे रोकना है, इस बारे में भी उन्हें बताया जाएगा। ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर सकें।
गांव में २०० व शहर में ५०० घर जांचेगा एक वालंटियर-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक वालंटियर एक सप्ताह के दौरान गांव में २०० व शहर में ५०० घरों की जांच करेगा। वह अपने द्वारा जांचेगे गए घरों पर अगले चार सप्ताह तक नजर रखेंगे। घर में जांच के दौरान वह कूलर, गमलों व छत पर पड़े टायरों में पानी को जांचेगा। जिसकी रिपोर्ट वह विभाग के अधिकारियों को देगा। अगर कहीं पर मलेरिया की ब्रिडिंग मिलेगी, तो तुरंत विभाग के अधिकारी हरकत में आ जाएंगे और उक्त जगह पर जाकर दवा का छिडक़ाव करेंगे और दवाइयां वितरित करेंगे। झूठी रिपोर्ट दी तो नपेंगे वालंटियर्स-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी वालंटियर्स ने झूठी रिपोर्ट दी तो वह नपेंगे। विभाग के अधिकारियों की मानें तो वालंटियर्स द्वारा जांचें गए घरों की विभाग द्वारा नियुक्ति अधिकारी द्वारा रेंडमली जांच की जाएगी। जांच के दौरान अगर कोई घर ठीक नहीं पाया गया या फिर वालंटियर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट गलत मिली, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ------------------------------------------------------------------------------------------------------
डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज विभाग की ओर से जारी पत्र उन्हें मिल गया है। गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही उनकी टे्रनिंग शुरू कर दी जाएगी। प्रदेश के सात जिलों में वालंटियर्स रखे जाएंगे। यमुनानगर में ६७० वालंटियर्स रखने का प्रावधान है। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग की जांच करेंगे। - डा. विजय मोहन अत्रेजा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं जिला मलेरिया अधिकारी, यमुनानगर। ------------------------------------------------------------------------------------------------------
गुरुवार, 24 मार्च 2011
बुधवार, 23 मार्च 2011
विश्व वानिकी दिवस मनाया गया World Forestry Day
विश्व वानिकी दिवस मनाया गया World Forestry Day
इस अवसर पर एक इको मार्च किया गया इस रैली का संचालन सुनील कुमार और मनोहर लाल अध्यापको ने किया,क्लब सदस्यों ने पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ के नारे लगा कर इस दिवस बारे जागरूकता संचार किया, इस अवसर पर एक गोष्टी भी की गयी जिस में अध्यापको ने क्लब सदस्यों को विश्व वानिकी दिवस और वनों के लाभों के बारे में बताया कि वनों से हमे आक्सीजन गैस मिलती है,वन वर्षा करवाने में सहायक हैं,वन भूमि कटाव रोकते है, वन,वन्य जीवों का आश्रय हैं,वन प्रदूषण दूर करते हैं और वनों से लकड़ी की प्राप्ती तो वनों का बहुत ही गौण लाभ है परन्तु मानव इस को ही सबसे बड़ा लाभ मान कर अंधाधुन्द वनों की कटाई कर रहा है जो कि धरती के लिए घातक है
उन्होंने बताया कि एक अनुमान है कि प्रति वर्ष १५ लाख हेक्टेयर वन कटते है । भारत की राष्ट्रीय वन नीति में कहा गया था कि देश एक-तिहाई हिस्से को हरा भरा वनों युक्त रखेंगे,लेकिन पिछले वर्षों में भू-उपग्रह के चित्रों से पता चलता है कि है कि देश में 33 प्रतिशत के बजाय 13 प्रतिशत ही वन क्षेत्र रह गया है। क्लब प्रभारी एवं क्लब ग्रुप लीडर दिलबाग सिंह ने सभी क्लब सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर के यह निर्णय लिया कि इस वर्ष जुलाई अगस्त में विद्यालय के खेल के मैदान में उचित जगहों पर फल-फूल ,छाया दार एवं औषधीय पेड़ पौधे लगाएं जाएँगे
द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)
आज राजकीय वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय अलाहर में विश्व वानिकी दिवस मनाया गया इस उपलक्ष्य में इको मार्च और गोष्टी का आयोजन किया गया, इमली इको क्लब के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि दुनिया भर में विश्व वानिकी दिवस प्रति वर्ष २१ मार्च को मनाया जाता है । सन् 1872 में अमेरिका के नेबरास्का में इसकी शुरूआत हुई, इस दिवस को मनाये जाने का सारा श्रेय जे-र्स्टीलंग मार्टिन को जाता है| इन्होने नेबरास्का में बड़ी संख्या में पौधे लगाए थे । इसके बाद इन्होंने अन्य निवासियों को फल-फूल, छायादार,पर्यावरण सरक्षंण और खुबसूरती हेतु पौधे लगाने की सलाह दी । उन्होंने सरकार को पौधे लगाने के लिए एक अलग विशेष दिन रखने के लिए राज़ी कर लिया । इस प्रकार तब से इस दिन विश्व वानिकी दिवस की शुरूआत हुई । प्रथम वानिकी दिवस पर एक लाख से ज्यादा पौधे लगाये गए, धीरे-धीरे पुरी दुनिया में यह दिवस एक महापर्व के रूप में मनाया जाने लगा ।
इस अवसर पर सभी सदस्यों व अध्यापकों संजय शर्मा,मुकेश रोहिल,संदीप कुमार,रविंदर कुमार का योगदान सराहनीय था |
अखबार में
द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)
सदस्यता लें
संदेश (Atom)









